JEE AAIAAN NOOO...

...ਸ਼ਬਦਾਂ ਦੀ ਫੁਲਵਾੜੀ ....

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Thursday, 15 December 2011

यह जाम तुम्हारी आँखों के..

यह जाम तुम्हारी आँखों के ,वह जाम उठाने न देते ;
तेरे गेसू तेरी चितवन ,मयखाने जाने न देते .

वो मादक मोहक अंगड़ाई ,जब हाथ उठा कर लेते हो ;
तन-मन पर जादू  छा जाए , यह तन-मन होश गंवा लेते .

मखमल से कोमल 'तन -मांसल ',और मन 'अतिकोमल भाव 'सा है ;
मैं जाम उठाऊँ भी तो क्या ,ये होश में आने न देते .


मयखाना मेरे पहलू में ,तो मैं मयखाने क्यों जाऊं
जिनको जाना हो वो जाएँ ,हम उनको ताने न देते 
दीप जीरवी
-

यह जाम तुम्हारी आँखों के..

यह जाम तुम्हारी आँखों के ,वह जाम उठाने न देते ;
तेरे गेसू तेरी चितवन ,मयखाने जाने न देते .

वो मादक मोहक अंगड़ाई ,जब हाथ उठा कर लेते हो ;
तन-मन पर जादू  छा जाए , यह तन-मन होश गंवा लेते .

मखमल से कोमल 'तन -मांसल ',और मन 'अतिकोमल भाव 'सा है ;
मैं जाम उठाऊँ भी तो क्या ,ये होश में आने न देते .


मयखाना मेरे पहलू में ,तो मैं मयखाने क्यों जाऊं
जिनको जाना हो वो जाएँ ,हम उनको ताने न देते 
दीप जीरवी
-

Monday, 14 November 2011

...साथ मगर तू हो

तन्हाई भी शहनाई हो ;साथ अगर तू हो.
अंगड़ाई पे अंगड़ाई ही ;साथ अगर तू हो .

सरगम सरगम साँस बने और हो धडकन पे ताल ;
चंदनिया भी शर्माई हो;साथ अगर तू हो .

ज़ुल्फ़ रुपेहिली ढांपे गोरा मुखड़ा तेरा... हो ;
इश्क जवानी गदराई हो ;साथ अगर तू हो .

तेरी चंचल चितवन ,मोहक नयन नशीले दो ;
महकी महकी महकी पुरवाई हो ;साथ अगर तू हो

प्रीत ना जाने रीत, जमाना अपने ठेंगे पे ;
चर्चा चाहे रुसवाई हो; साथ मगर तू हो
दीप जीर्वी 9815524600 .

...साथ मगर तू हो

तन्हाई भी शहनाई हो ;साथ अगर तू हो.
अंगड़ाई पे अंगड़ाई ही ;साथ अगर तू हो .

सरगम सरगम साँस बने और हो धडकन पे ताल ;
चंदनिया भी शर्माई हो;साथ अगर तू हो .

ज़ुल्फ़ रुपेहिली ढांपे गोरा मुखड़ा तेरा... हो ;
इश्क जवानी गदराई हो ;साथ अगर तू हो .

तेरी चंचल चितवन ,मोहक नयन नशीले दो ;
महकी महकी महकी पुरवाई हो ;साथ अगर तू हो

प्रीत ना जाने रीत, जमाना अपने ठेंगे पे ;
चर्चा चाहे रुसवाई हो; साथ मगर तू हो
दीप जीर्वी 9815524600 .

Tuesday, 8 November 2011

तो गजल हुई


....
और भोर भी लाली लगी मलने ,तो गज़ल हुई.






वो आए जब मुझ से मिलने ,तो गज़ल हुई;
मचले अरमां महके सपने ,तो गज़ल हुई.
'मखमल' रेशम से ख्वाब सुहाने सच हों जब ;
जब सूरत परी लगे सजने ;तो गज़ल हुई.
वो दिल के तार को छू ,गुज़रे आहिस्ता से ;
सरगम सांसों में लगी बजने  ;तो गज़ल हुई.

वो तारा पिछले पहर का भी जब विदा हुआ ;
आगोश से उठ वो लगे चलने ,तो गज़ल हुई.
जब दीवट पर रात से जलता दीप 'बढ़ा ';
और भोर भी लाली लगी मलने ,तो गज़ल हुई.


deepzirvi

तो गजल हुई


....
और भोर भी लाली लगी मलने ,तो गज़ल हुई.






वो आए जब मुझ से मिलने ,तो गज़ल हुई;
मचले अरमां महके सपने ,तो गज़ल हुई.
'मखमल' रेशम से ख्वाब सुहाने सच हों जब ;
जब सूरत परी लगे सजने ;तो गज़ल हुई.
वो दिल के तार को छू ,गुज़रे आहिस्ता से ;
सरगम सांसों में लगी बजने  ;तो गज़ल हुई.

वो तारा पिछले पहर का भी जब विदा हुआ ;
आगोश से उठ वो लगे चलने ,तो गज़ल हुई.
जब दीवट पर रात से जलता दीप 'बढ़ा ';
और भोर भी लाली लगी मलने ,तो गज़ल हुई.


deepzirvi

Sunday, 6 November 2011

पायल कंगन झुमके बिंदिया


 




पायल कंगन झुमके बिंदिया
चोर चुरावें मेरी निंदिया ||1
दधक दधक जियरा दधकै
बरसे छम छम बारिश बुंदिया ||2
धडक धडक धड्कावे दिल को
चकवा चितवे है चंदिया  .3
डग मग डग मग डोल रही है ;
नय्या के अंग संग ही नदिया .4
उस को  भूला अपना वादा
रूँ आँसी है मन की बगिया5
दीप जीरवी

पायल कंगन झुमके बिंदिया


 




पायल कंगन झुमके बिंदिया
चोर चुरावें मेरी निंदिया ||1
दधक दधक जियरा दधकै
बरसे छम छम बारिश बुंदिया ||2
धडक धडक धड्कावे दिल को
चकवा चितवे है चंदिया  .3
डग मग डग मग डोल रही है ;
नय्या के अंग संग ही नदिया .4
उस को  भूला अपना वादा
रूँ आँसी है मन की बगिया5
दीप जीरवी

Thursday, 3 November 2011

जुल्फ रुखसार पे जरा बहकी ;

जुल्फ रुखसार पे जरा बहकी ;
देखिये न तभी हवा बहकी .
यार!मयखाने हैं झुकी पलकें ;
साँस चलती है दिलरुबा बहकी .
मरमरी जिस्म ,उफनता यौवन ;
मेरी नीयत कहा कहा बहकी .
साँस कुछ  तेज़ तेज़ चलती है ;
मोहनी सी यहाँ कला बहकी .
पेड़ लिपटाए गिर्द बेलों को ,
देखिये सोचिये अदा बहकी .
जान-ए-मन,जान-ए-जां,जान-ए-नग्मा;
ताल दे दो जरा जरा बहकी.
 दीप जीरवी

जुल्फ रुखसार पे जरा बहकी ;

जुल्फ रुखसार पे जरा बहकी ;
देखिये न तभी हवा बहकी .
यार!मयखाने हैं झुकी पलकें ;
साँस चलती है दिलरुबा बहकी .
मरमरी जिस्म ,उफनता यौवन ;
मेरी नीयत कहा कहा बहकी .
साँस कुछ  तेज़ तेज़ चलती है ;
मोहनी सी यहाँ कला बहकी .
पेड़ लिपटाए गिर्द बेलों को ,
देखिये सोचिये अदा बहकी .
जान-ए-मन,जान-ए-जां,जान-ए-नग्मा;
ताल दे दो जरा जरा बहकी.
 दीप जीरवी

Friday, 28 October 2011

जाना! जाना जाने दो



देर लगी मिलने में ,अब तो ,जाना! जाना जाने दो .

बैठो जाना! कुछ बतिआओ ,जाना! जाना जाने दो .
-०-
चाँद खिलौना ले देंगे तुम को, तुम जानम ! बहलो तो ;

चाँद नगर में आकर के फिर जाना! जाना जाने दो .
-०-
चलो धनक पर झूला झूलें ,अमराई पे अंगड़ाई है ;

प्रेम हिंडोले में झूलें गे ;जाना! जाना जाने दो .
-०-
मादक मोहक मदन मोहनी ,मलय गिरी की पुरवाई है ;

रति -मदन सा मिलेंगे जानम; जाना! जाना जाने दो .
दीप जीरवी
9815524600


जाना! जाना जाने दो



देर लगी मिलने में ,अब तो ,जाना! जाना जाने दो .

बैठो जाना! कुछ बतिआओ ,जाना! जाना जाने दो .
-०-
चाँद खिलौना ले देंगे तुम को, तुम जानम ! बहलो तो ;

चाँद नगर में आकर के फिर जाना! जाना जाने दो .
-०-
चलो धनक पर झूला झूलें ,अमराई पे अंगड़ाई है ;

प्रेम हिंडोले में झूलें गे ;जाना! जाना जाने दो .
-०-
मादक मोहक मदन मोहनी ,मलय गिरी की पुरवाई है ;

रति -मदन सा मिलेंगे जानम; जाना! जाना जाने दो .
दीप जीरवी
9815524600


Monday, 26 September 2011

मैं भला खुशबू को बुत कर के दिखाऊँ कैसे



इश्क की ज़ात बताएं तो बताऊँ कैसे 
मैं भला खुशबू को बुत कर के दिखाऊँ कैसे .

मैं तुझे और तेरी अदा को जलवे को 

अपनी पलकों में कहो तो यूं समाऊँ कैसे .

रौशनी इश्क गली में नहीं होगी ऐसे ;
दिल जिगर जान कहो मैं भी जलाऊँ कैसे .

पारा है सोच तेरी ,पारसा खुद तू भी नहीं ;

अपना हमराज़ सुनो तुमको बनाऊँ कैसे .

ओ हवा मुझको बता तेरा इरादा क्या है ;

मै तेरे सामने मन दीप जलाऊँ वैसे .. 
दीपजीर्वी 
२७-९-२०११







मैं भला खुशबू को बुत कर के दिखाऊँ कैसे



इश्क की ज़ात बताएं तो बताऊँ कैसे 
मैं भला खुशबू को बुत कर के दिखाऊँ कैसे .

मैं तुझे और तेरी अदा को जलवे को 

अपनी पलकों में कहो तो यूं समाऊँ कैसे .

रौशनी इश्क गली में नहीं होगी ऐसे ;
दिल जिगर जान कहो मैं भी जलाऊँ कैसे .

पारा है सोच तेरी ,पारसा खुद तू भी नहीं ;

अपना हमराज़ सुनो तुमको बनाऊँ कैसे .

ओ हवा मुझको बता तेरा इरादा क्या है ;

मै तेरे सामने मन दीप जलाऊँ वैसे .. 
दीपजीर्वी 
२७-९-२०११







...वतन वालो !फिर न गिला कीजिएगा

अमीर-ए-शहर ने सोचा है अब के ,गरीबों के दिल की दुआ लीजिये गा ;

मयार-ए-गरीबी बदल कर शहर में ,सभी को अमीर अब चलो कीजिए गा . 

बड़ा दिल है इनका ,बड़ा हौसला है   ,कि आकाश पाताल सा फासला जो  ;

मिटा कर बनाएं तखय्युल क़ी खिचडी ,औ चाहें सभी को खिला दीजिए गा . 

वो तन के जो नंगे ;हैं भूखे ;भिखारी ;जिन्हें खुद बताते रहे ये :बीमारी ;

जिन्हें मार डाला था कामों से अपने ,कहें ये उन्हें अब जला दीजिए गा .

न तन देश का ये समझते हैं अपना ,न 'मन देश का है' ये माना इन्होंने ;

'मगर' के सगे हैं ये मक्कार लोमड ,'समझकर' इन्हें बस मिला कीजिए गा .

जो देखा जो समझा बताया है हमने ,फर्ज़ था हमारा निभाया है हमने ;

मेरी बात को यूं हवा में उड़ाकर,वतन वालो !फिर न गिला कीजिएगा 
दीपजीरवी
२६-९-११

...वतन वालो !फिर न गिला कीजिएगा

अमीर-ए-शहर ने सोचा है अब के ,गरीबों के दिल की दुआ लीजिये गा ;

मयार-ए-गरीबी बदल कर शहर में ,सभी को अमीर अब चलो कीजिए गा . 

बड़ा दिल है इनका ,बड़ा हौसला है   ,कि आकाश पाताल सा फासला जो  ;

मिटा कर बनाएं तखय्युल क़ी खिचडी ,औ चाहें सभी को खिला दीजिए गा . 

वो तन के जो नंगे ;हैं भूखे ;भिखारी ;जिन्हें खुद बताते रहे ये :बीमारी ;

जिन्हें मार डाला था कामों से अपने ,कहें ये उन्हें अब जला दीजिए गा .

न तन देश का ये समझते हैं अपना ,न 'मन देश का है' ये माना इन्होंने ;

'मगर' के सगे हैं ये मक्कार लोमड ,'समझकर' इन्हें बस मिला कीजिए गा .

जो देखा जो समझा बताया है हमने ,फर्ज़ था हमारा निभाया है हमने ;

मेरी बात को यूं हवा में उड़ाकर,वतन वालो !फिर न गिला कीजिएगा 
दीपजीरवी
२६-९-११

Friday, 9 September 2011

मोल -हीन सब यह ,बिन 'श्यामल'

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दीप जीरवी
--------------------  


मृदंग -झांज -मंजीरा -पायल
मन घायल तो सब कुछ घायल
रूआंसे रूआंसे सब हों
गुल-तितली ,गुलशन और कोयल ..
लाख घटाएँ गरजें बरसें ;
चातक तो  पीवे स्वाति जल .
चाँद -घटा- बिजली और बादल;
बिन सांवरिया सब कुछ बेकल .
मन -दर्पण में कोई न झांके ;
हर कोई देखे तन मांसल .
यह फैशन है वो है परचम;
यह भी आंचल,वह भी आंचल
राधा-मीरा-रुक्मणी -भामा;
मोल -हीन सब यह ,बिन 'श्यामल'
-दीप जीरवी

मोल -हीन सब यह ,बिन 'श्यामल'

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दीप जीरवी
--------------------  


मृदंग -झांज -मंजीरा -पायल
मन घायल तो सब कुछ घायल
रूआंसे रूआंसे सब हों
गुल-तितली ,गुलशन और कोयल ..
लाख घटाएँ गरजें बरसें ;
चातक तो  पीवे स्वाति जल .
चाँद -घटा- बिजली और बादल;
बिन सांवरिया सब कुछ बेकल .
मन -दर्पण में कोई न झांके ;
हर कोई देखे तन मांसल .
यह फैशन है वो है परचम;
यह भी आंचल,वह भी आंचल
राधा-मीरा-रुक्मणी -भामा;
मोल -हीन सब यह ,बिन 'श्यामल'
-दीप जीरवी

Friday, 2 September 2011

एक नया इतिहास बनाना लगता है

जागा जागा दर्द, सुहाना लगता है

आया वो ही याद जमाना लगता है .
कुछ लोगों को शाम सुहानी लगती है

मुझ जैसों को चाँद पुराना लगता है .

आग जिगर की लगते लगते लग जाती ,

बुझते बुझते एक जमाना लगता है .

खुशीओं का जमघट जमघट सा दीखता है

शायद फिर से गम को आना लगता है

मन उपवन सूना सूना सा रहता है

मरघट मन को बड़ा सुहाना लगता है .



दिल धडकन के साथ लड़ाई करता है ;

दिल,मुझसा ही कोई दीवाना लगता है .



मछली सागर छोड़; गई सहराओं में,

एक नया  इतिहास बनाना लगता है .
दीप जीरवी

एक नया इतिहास बनाना लगता है

जागा जागा दर्द, सुहाना लगता है

आया वो ही याद जमाना लगता है .
कुछ लोगों को शाम सुहानी लगती है

मुझ जैसों को चाँद पुराना लगता है .

आग जिगर की लगते लगते लग जाती ,

बुझते बुझते एक जमाना लगता है .

खुशीओं का जमघट जमघट सा दीखता है

शायद फिर से गम को आना लगता है

मन उपवन सूना सूना सा रहता है

मरघट मन को बड़ा सुहाना लगता है .



दिल धडकन के साथ लड़ाई करता है ;

दिल,मुझसा ही कोई दीवाना लगता है .



मछली सागर छोड़; गई सहराओं में,

एक नया  इतिहास बनाना लगता है .
दीप जीरवी